डिजिटल डिवाइड सूचना और संचार प्रौद्योगिकियों (आईसीटी) तक पहुंच, उपयोग और ज्ञान में असमानता को दर्शाता है, जो आर्थिक व सामाजिक समूहों के बीच गहरा विभाजन पैदा करता है। डिजिटल डिवाइड: सामाजिक न्याय के सामने 21वीं सदी की सबसे बड़ी चुनौती आज जब हम 5G, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल इंडिया की बात करते हैं, तब एक महत्वपूर्ण सवाल हमारे सामने खड़ा होता है— क्या सच में हर नागरिक डिजिटल क्रांति का हिस्सा है? अगर नहीं, तो यह केवल तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय (Social Justice) के लिए एक गंभीर चुनौती है। भारत में डिजिटल परिवर्तन को गति देने के लिए अभियान शुरू किया गया। इसके अंतर्गत जैसी परियोजनाओं द्वारा गाँव-गाँव इंटरनेट पहुँचाने का प्रयास हुआ। परंतु जमीनी सच्चाई यह बताती है कि डिजिटल संसाधनों तक समान पहुँच अभी भी एक सपना है। इस लेख में हम समझेंगे— डिजिटल डिवाइड क्या है यह सामाजिक न्याय को कैसे प्रभावित करता है भारत में इसकी वर्तमान स्थिति संवैधानिक और नीतिगत आयाम और समाधान की संभावित दिशा 1. डिजिटल डिवाइड क्या है? डिजिटल डिवाइड (Digital Divide) का अर्थ है— समाज के व...