ओपेनहाइमर और भगवद्गीता-महाभारत: विज्ञान की आग और आध्यात्म की शांति का विस्फोटक मिलन.kya sach mein Mahabharat mein Parmanu Bam ka jikr hai !
क्या आप जानते हैं कि दुनिया का सबसे घातक हथियार बनाने वाले वैज्ञानिक ने प्राचीन भारतीय ग्रंथ से प्रेरणा ली? जूलियस रॉबर्ट ओपेनहाइमर, "परमाणु बम के पिता", ने जब पहला परमाणु विस्फोट देखा, तो उनके मुंह से निकला: "Now I am become Death, the destroyer of worlds." यह शब्द भगवद्गीता के एक श्लोक से सीधे लिए गए थे! ओपेनहाइमर और भगवद्गीता: जब परमाणु विस्फोट में गूँजी कुरुक्षेत्र की प्रतिध्वनि 16 जुलाई 1945। न्यू मैक्सिको का रेगिस्तान। अंधेरी सुबह। अचानक आकाश में एक ऐसी चमक उठती है मानो सचमुच “हजार सूर्यों” ने एक साथ उदय ले लिया हो। मानव इतिहास का पहला परमाणु विस्फोट—ट्रिनिटी टेस्ट। उस क्षण, वैज्ञानिकों की भीड़ के बीच खड़े जे. रॉबर्ट ओपेनहाइमर के मन में जो शब्द उठे, वे किसी आधुनिक वैज्ञानिक ग्रंथ से नहीं थे। वे आए थे एक प्राचीन भारतीय शास्त्र से— भगवद्गीता से: “कालोऽस्मि लोकक्षयकृत् प्रवृद्धो…” “Now I am become Death, the destroyer of worlds.” यह महज़ एक उद्धरण नहीं था। यह विज्ञान और आध्यात्म के बीच एक अद्भुत, जटिल और कहीं-कहीं बेचैन कर देने वाला संवाद था। यह ब्लॉग उसी संवाद ...