भारत में जातीय राजनीति क्यों? रोजगार विकास और महंगाई के मुद्दे गायब हैं। bhartiya rajniti mein jaati ki bhumika ki vivechna kijiye
नमस्ते भाइयों आप किसी भी जातीय धर्म से हो यदि भारत से प्रेम करते हो तो यह लेख आपके लिए बहुत जरूरी है। यह लेख लोगो से शेयर करें कि यह जानकारी प्रत्येक भारतीय तक पहुंच सके। भारत में जातीय राजनीति क्यों? रोजगार विकास और महंगाई के मुद्दे गायब हैं। परिचय भारत एक विविधतायुक्त देश है—धर्म, भाषा, संस्कृति, क्षेत्र, वर्ग और जाति के आधार पर विभेदित। संविधान ने समानता, सामाजिक न्याय और अवसर की गारंटी दी है। परन्तु चुनावी राजनीति में जाति प्रमुख पहचान-आधारित कारक के रूप में बनी हुई है। आपका प्रश्न बहुत महत्वपूर्ण है: क्या भारत सरकार ने रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, महंगाई और नवाचार जैसे मूलभूत मुद्दों की तुलना में जातीय राजनीति पर अधिक ध्यान दिया है? यदि हाँ, तो क्यों — और उसके परिणाम क्या हैं? यह लेख इसी प्रश्न का व्यापक , संदर्भित , तथ्यपरक , और समालोचनात्मक उत्तर प्रदान करेगा। खंड 1: भारतीय राजनीति में पहचान-आधारित राजनीति का इतिहास भारत में पहचान-आधारित राजनीति नई नहीं है—यह इतिहास, सामांजस्यिक संरचना, सीमित संसाधनों की प्रतिस्पर्धा और राजनीतिक नेतृत्व के फैसलों से विकसित हु...