भारतीय समाज की संरचना को समझना हो तो जाति व्यवस्था को समझना अनिवार्य है। और यदि बिहार–पूर्वांचल के सामाजिक और राजनीतिक इतिहास को पढ़ना हो, तो भूमिहार जाति की चर्चा किए बिना वह अधूरा रह जाता है। भूमिहार जाति की उत्पत्ति: इतिहास,परंपरा,सामाजिक संघर्ष और पहचान का विश्लेषण यह लेख हर एक भूमिहार तक पहुंचाएँ भूमिहार जाति, जिसे प्रायः “भूमिहार ब्राह्मण” या बाभम कहा जाता है, मुख्यतः बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में निवास करने वाला एक प्रभावशाली सामाजिक समूह है। इसकी उत्पत्ति को लेकर पौराणिक, ऐतिहासिक और समाजशास्त्रीय स्तर पर विभिन्न मत प्रचलित हैं। यह लेख उपलब्ध ऐतिहासिक स्रोतों, औपनिवेशिक जनगणना रिपोर्टों, समाजशास्त्रीय अध्ययनों और आधुनिक शोध कार्यों के आधार पर भूमिहार जाति की उत्पत्ति, सामाजिक स्थिति, भूमि स्वामित्व संरचना और पहचान-निर्माण की प्रक्रिया का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। 1. प्रस्तावना भारतीय जाति व्यवस्था के अध्ययन में “भूमिहार” एक विशिष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हैं, जहाँ वर्ण-आधारित पहचान और भूमि-आधारित शक्ति संरचना परस्पर जुड़ी हुई दिखाई देती है। भूमिहार स्वयं को ...